𝕝𝕝 *ॐ* 𝕝𝕝
हमारा मन जीवन में सुख की कामना तो करता है लेकिन उन मार्गों को नहीं त्यागता जिन मार्गों से दुःख हमारे जीवन में प्रवेश करता है *

दुःख भगवान का दंड नहीं *अपितु* असत्य या अनीति का साथ देने का परिणाम ही होता है *

हमें अगर सुख की चाह है तो हमको अपनी राह परिवर्तित करनी होगी *जीवन में दौड़ने से अधिक महत्व सही दिशा में चलने का है .

अगर स्वार्थ, अनीति, असत्य और अहंकार के विकारों को हम अपने अंतर्मन से निकाल देंगे तो हमें जीवन में निर्बाध सुख और संतुष्टि का स्वाद मिलता रहेगा *इसमें संदेह नहीं .
आज अपने प्रभु से जीवन में सदा सन्मार्ग पर चलने की अलौकिक प्रार्थना के साथ *

~~~~~~~~~~ *मास्क ना हो नीचे
कोरोना का खतरा अभी खत्म नहीं हुआ
*नियमों* का पालन करें और *सुरक्षित रहें*
सावधानी *अभी* भी *जरूरी* ~~~~~~
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