🙏🏻 पंचांग 🙏
🌤️ 💥दिनांक - 21 सितम्बर 2022
🌤️ 💥दिन - बुधवार
🌤️ 💥विक्रम संवत - 2079 (गुजरात-2078)
🌤️ 💥शक संवत -1944
🌤️ 💥अयन - दक्षिणायन
🌤️ 💥ऋतु - शरद ॠतु
🌤️ 💥मास - अश्विन (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार भाद्रपद)
🌤️ 💥पक्ष - कृष्ण
🌤️ 💥तिथि - एकादशी रात्रि 11:34 तक तत्पश्चात द्वादशी
🌤️ 💥नक्षत्र - पुष्य रात्रि 11:47 तक तत्पश्चात अश्लेशा
🌤️ 💥योग - परिघ सुबह 09:13 तक तत्पश्चात शिव
🌤️ 💥राहुकाल - दोपहर 12:32 से दोपहर 02:03 तक
🌞 💥सूर्योदय - 06:28
🌦️ 💥सूर्यास्त - 18:35
👉 💥दिशाशूल - उत्तर दिशा में
🚩 🍀व्रत पर्व विवरण - इंदिरा एकादशी, एकादशी का श्राद्ध
🔥 🍀विशेष - हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है l राम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।
💥 आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l
💥 एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।
💥 एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।
💥 जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।
🌷 💦इंदिरा एकादशी💦 🌷
➡️ 💥20 सितम्बर 2022 मंगलवार को रात्रि 09:27 से 21 सितम्बर, बुधवार को रात्रि 11:34 तक एकादशी है ।
💥 विशेष - 21 सितम्बर, बुधवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।
🙏🏻 💥इंदिरा एकादशी व्रत से बड़े – बड़े पापों का नाश हो जाता है | यह नीच योनियों में पड़े हुए पितरों को भी सद्गति देनेवाली है | इसका माहात्म्य पढ़ने-सुनने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है | - पद्म पुराण
🌷 💦कौन सा वृक्ष लगाने से क्या फल मिलता है💦🌷
🙏🏻 भविष्यपुराण में आता हैं कि अशोक-वृक्ष लगाने से कभी शोक नहीं होता, प्लक्ष (पाकड़) वृक्ष उत्तम स्त्री प्रदान करवाता है ज्ञानरुपी फल भी देता हैं | बिल्ववृक्ष दीर्घ आयुष्य प्रदान करता है | जामुन का वृक्ष धन देता है, तेंदू का वृक्ष कुलबुद्धि कराता है | दाडिम (अनार) का वृक्ष स्त्री-सुख प्राप्त कराता है | बकुल पाप-नाशक, यंजुल (तिनिश) बल-बुद्धिप्रद है | धातकी (धव) स्वर्ग प्रदान करता हैं | वटवृक्ष मोक्षप्रद, आम्रवृक्ष अभीष्ट कामनाप्रद और गुवाक (सुपारी) का वृक्ष सिद्धिप्रद है | वल्वल, मधूक (महुआ) तथा अर्जुन-वृक्ष सब प्रकार का अन्न प्रदान करता है | कदम्ब-वृक्ष से विपुल लक्ष्मी की प्रप्ति होती है | तिन्तिडी )इमली) का वृक्ष धर्मदूषक माना गया है | शमी-वृक्ष रोग-नाशक है | केशर से शत्रुओं का विनाश होता है | श्वेत वट धनप्रदाता पनस (कटहल)वृक्ष मंद बुद्धिकारक है | मर्कटी (केंवाच)एवं कदम-वृक्ष के लगाने से संतति का क्षय होता है |
🌺शीशम, अर्जुन, जयंती, करवीर, बेल तथा पलाश- वृक्षों के आरोपण से स्वर्ग की प्राप्ति होती है | विधिपूर्वक वृक्ष का रोपण करने से स्वर्ग-सुख प्राप्त होता है और रोपणकर्ता के तीन जन्मों
के पाप नष्ट हो जाते हैं |
