🙏🍀 पंचांग 🍀🙏
⛅🍀दिनांक - 26 सितम्बर 2022
⛅🍀दिन - सोमवार
⛅🍀विक्रम संवत् - 2079
⛅🍀शक संवत् - 1944
⛅🍀अयन - दक्षिणायन
⛅🍀ऋतु - शरद
⛅🍀मास - आश्विन
⛅🍀पक्ष - शुक्ल
⛅🍀तिथि - प्रतिपदा 27 सितम्बर प्रातः 03:08 तक तत्पश्चात द्वितीया
⛅🍀नक्षत्र - हस्त 27 सितम्बर सुबह 06:16 तक तत्पश्चात चित्रा
⛅🍀योग - शुक्ल सुबह 08:06 तक तत्पश्चात ब्रह्म
⛅🍀राहु काल - सुबह 08:00 से 09:30 तक
⛅🍀सूर्योदय - 06:29
⛅🍀सूर्यास्त - 06:32
⛅🍀दिशा शूल - पूर्व दिशा में
⛅🍀ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 04:54 से 05:42 तक
⛅🍀निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:07 से 12:55 तक
⛅🍀व्रत पर्व विवरण - शारदीय नवरात्र प्रारम्भ
⛅ 🍀विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) 

🌺नवरात्रि : 26 सितम्बर से 04 अक्टूबर 2022🌺

🌹 नवरात्र - व्रत पापनाशक है । इसमें उपवास करके देवी भगवती की पूजा, जप व होम करने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है । धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष - इन चारों की अभिलाषा करनेवाले को यह उत्तम व्रत अवश्य करना चाहिए ।

🌹नवरात्रि के दिनों का अर्थ🌹

🌹नवरात्रि के प्रथम तीन दिन होते हैं माँ काली की उपासना के होते हैं... जिसमे अपने काले कर्मो की निवृति के लिए जप किया जाता है ।

🌹नवरात्रि के दूसरे ३ दिन लक्ष्मी की उपासना के होते है... ताकि हम सफल सम्पदा के अधिकारी बनें ।

🌹आखिरी ३ दिन सरस्वती की उपासना के होते हैं... ताकि हमारे जीवन में प्रज्ञा ज्ञान का अर्जन हो । उसके लिए सारस्वत्य मंत्र का जप और सूर्य नारायण का ध्यान करना चाहिये ।

🌹देवी भागवत के तीसरे स्कन्द में नवरात्रि का महत्त्व वर्णन किया है । मनोवांछित सिद्धियाँ प्राप्त करने के लिए देवी की महिमा सुनायी है, नवरात्रि के 9 दिन उपवास करने के शारीरिक लाभ बताये हैं ।

1. शरीर में आरोग्य के कण बढ़ते हैं ।

2. जो उपवास नहीं करता तो रोगों का शिकार हो जाता है, जो नवरात्रि के उपवास करता है, तो भगवान की आराधना होती है, पुण्य तो बढ़ता ही है, लेकिन शरीर का स्वास्थ्य भी वर्ष भर अच्छा रहता है ।

3. प्रसन्नता बढ़ती है ।

4. द्रव्य की वृद्धि होती है ।

5. लंघन और विश्रांति से रोगी के शरीर से रोग के कण खत्म होते हैं ।

🌹नवरात्रि में जप से श्रेष्ठ लक्ष्मी की प्राप्ति होती हैं । और वह जप का मंत्र बताया गया हैं । इस मंत्र से लक्ष्मी जी महालक्ष्मी होकर भोग और मोक्ष देनेवाली बनती हैं ।

🍀"ॐ श्रीं ह्रीं क्लिं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा "🍀

माता रानी को दिन के अनुसार भोग लगाने पर क्या लाभ मिलता है और कौन-सी समस्याएं दूर होती हैं। किस दिन कौन सा प्रसाद चढ़ाकर प्रसन्न करें देवी मां को - 
 
1 नवरात्रि का पहला दिन यानि मां शैलपुत्री का दिन। इस दिन देवी मां के चरणों में गाय का शुद्ध घी अर्पित करने से आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है। तथा सभी व्याधि‍यां दूर होकर शरीर निरोगी रहता है। 

 
2 नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी का होता है। इस दिन देवी मां को शक्कर का भोग लगाने से वे प्रसन्न होती हैं। इस भोग को देवी के चरणों में अर्पित करने के बाद परिवार के सदस्यों में बांटने से सभी की आयु में वृद्ध‍ि होती है। 
 
3 नवदुर्गा का एक रूप है चंद्रघंटा। मां के इस रूप का पूजन नवरात्रि के तीसरे दिन होता है। इस दिन मां को दूध या दूध से बनी मिठाई खीर का भोग लगाकर ब्राह्मणों को दान करना शुभ होता है। इससे दुखों की मुक्ति होकर परम आनंद की प्राप्ति होती है। 

 
4 मां दुर्गा को नवरात्रि के चौथे दिन मालपुए का भोग लगाने से वे प्रसन्न होती हैं। इस भोग को मंदिर के ब्राह्मण को दान करना चाहिए। ऐसा करने से बुद्धि का विकास होने के साथ-साथ निर्णय शक्ति बढ़ती है। 


5 नवरात्रि का पांचवा दिन यानि मां स्कंदमाता का दिन। इस दिन माता जी को केले का नैवेद्य चढ़ाना बहुत उत्तम होता है। ऐसा करने से आपको उत्तम स्वास्थ्य और निरोगी काया की प्राप्ति होती है।

 
6 नवरात्रि के छठवें दिन देवी मां को शहद का भोग लगाना बहुत अच्छा माना जाता है। इस दिन शहद का भोग लगाने से मनुष्य की आकर्षण शक्ति में वृद्धि होती है।
 
7 नवरात्रि का सप्तम दिन देवी मां को गुड़ का भोग लगाएं। सातवें नवरात्रि पर मां को गुड़ का नैवेद्य चढ़ाने व उसे ब्राह्मण को दान करने से शोक से मुक्ति मिलती है एवं आकस्मिक आने वाले संकटों से रक्षा भी होती है। 

 
8 नवरात्रि के आठवें दिन माता रानी को नारियल का भोग लगाएं और नारियल का दान भी करें। इससे संतान संबंधी सभी परेशानियों से छुटकारा मिलता है और देवी मां की कृपा प्राप्त होती है। 
 
9 नवरात्रि के अंति‍म दिन यानि नवमी तिथि के दिन तिल का भोग लगाकर ब्राह्मण को दान दें। इससे मृत्यु भय से राहत मिलती है, साथ ही अनहोनी होने की घटनाओं से बचाव भी होगा।