🙏♨️ वैदिक पंचांग ♨️🙏
🌤️ 🍀दिनांक - 01 अक्टूबर 2022
🌤️ 🍀दिन - शनिवार
🌤️ 🍀विक्रम संवत - 2079 (गुजरात-2078)
🌤️ 🍀शक संवत -1944
🌤️ 🍀अयन - दक्षिणायन
🌤️ 🍀ऋतु - शरद ॠतु
🌤️ 🍀मास - अश्विन
🌤️ 🍀पक्ष - शुक्ल
🌤️ 🍀तिथि - षष्ठी रात्रि 08:46 तक तत्पश्चात सप्तमी
🌤️ 🍀नक्षत्र - जेष्ठा 02 अक्टूबर रात्रि 03:11 तक तत्पश्चात मूल
🌤️ 🍀योग - आयुष्मान शाम 07:59 तक तत्पश्चात सौभाग्य
🌤️ 🍀राहुकाल - सुबह 09:29 से सुबह 10:59 तक
🌞 🍀सूर्योदय - 06:30
🌦️ 🍀सूर्यास्त - 18:25
👉 दिशाशूल - पूर्व दिशा में
🚩 🍀व्रत पर्व विवरण -
🔥 विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
🌷 घातक रोगों से मुक्ति पाने का उपाय 🌷
👉🏻 02 अक्टूबर 2022 रविवार को (सूर्योदय से शाम 06:48 तक) रविवारी सप्तमी है।
🙏🏻 रविवार सप्तमी के दिन बिना नमक का भोजन करें। बड़ दादा के १०८ फेरे लें । सूर्य भगवान का पूजन करें, अर्घ्य दें व भोग दिखाएँ, दान करें । तिल के तेल का दिया सूर्य भगवान को दिखाएँ ये मंत्र बोलें :-
🌷 "जपा कुसुम संकाशं काश्य पेयम महा द्युतिम । तमो अरिम सर्व पापघ्नं प्रणतोस्मी दिवाकर ।।"
💥 नोट : घर में कोई बीमार रहता हो या घातक बीमारी हो तो परिवार का सदस्य ये विधि करें तो बीमारी दूर होगी ।
🌷 मंत्र जप एवं शुभ संकल्प हेतु विशेष तिथि
🙏🏻 सोमवती अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी, बुधवारी अष्टमी – ये चार तिथियाँ सूर्यग्रहण के बराबर कही गयी हैं।
🌷 इनमें किया गया जप-ध्यान, स्नान , दान व श्राद्ध अक्षय होता है।
🙏🏻 (शिव पुराण, विद्येश्वर संहिताः अध्याया (10)
🌷 रविवार सप्तमी 🌷
🙏🏻 रविवार सप्तमी के दिन जप/ध्यान करने का वैसा ही हजारों गुना फल होता है जैसा की सूर्य/चन्द्र ग्रहण में जप/ध्यान करने से होता |
🙏🏻 रविवार सप्तमी के दिन अगर कोई नमक मिर्च बिना का भोजन करे और सूर्य भगवान की पूजा करे , तो उसकी घातक बीमारियाँ दूर हो सकती हैं , अगर बीमार व्यक्ति न कर सकता हो तो कोई और बीमार व्यक्ति के लिए यह व्रत करे | इस दिन सूर्यदेव का पूजन करना चाहिये |
🌞 सूर्य भगवान पूजन विधि 🌞
🙏🏻 १) सूर्य भगवान को तिल के तेल का दिया जला कर दिखाएँ , आरती करें |
🙏🏻 २) जल में थोड़े चावल ,शक्कर , गुड , लाल फूल या लाल कुम कुम मिला कर सूर्य भगवान को अर्घ्य दें |
🌞 सूर्य भगवान अर्घ्य मंत्र 🌞
🌷 1. ॐ मित्राय नमः।
🌷 2. ॐ रवये नमः।
🌷 3. ॐ सूर्याय नमः।
🌷 4. ॐ भानवे नमः।
🌷 5. ॐ खगाय नमः।
🌷 6. ॐ पूष्णे नमः।
🌷 7. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।
🌷 8. ॐ मरीचये नमः।
🌷 9. ॐ आदित्याय नमः।
🌷 10. ॐ सवित्रे नमः।
🌷 11. ॐ अर्काय नमः।
🌷 12. ॐ भास्कराय नमः।
🌷 13. ॐ श्रीसवितृ-सूर्यनारायणाय नमः।
🌷 शारदीय नवरात्रि 🌷
🙏🏻 नवरात्रि की सप्तमी तिथि यानी सातवें दिन माता दुर्गा को गुड़ का भोग लगाएं ।इससे हर मनोकामना पूरी हो सकती है।
🌷 शारदीय नवरात्रि 🌷
🙏🏻 शत्रुओं का नाश करती हैं मां कालरात्रि
महाशक्ति मां दुर्गा का सातवां स्वरूप हैं कालरात्रि। मां कालरात्रि काल का नाश करने वाली हैं, इसी वजह से इन्हें कालरात्रि कहा जाता है। मां कालरात्रि की आराधना के समय भक्त को अपने मन को भानु चक्र जो ललाट अर्थात सिर के मध्य स्थित करना चाहिए। इस आराधना के फलस्वरूप भानु चक्र की शक्तियां जागृत होती हैं। मां कालरात्रि की भक्ति से हमारे मन का हर प्रकार का भय नष्ट होता है। जीवन की हर समस्या को पल भर में हल करने की शक्ति प्राप्त होती है। शत्रुओं का नाश करने वाली मां कालरात्रि अपने भक्तों को हर परिस्थिति में विजय दिलाती हैं ।
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